भगवत् कृपा हि केवलम् !

भगवत् कृपा हि केवलम् !

Monday, 30 April 2018

बुद्ध के नाम पर घृणा फैलाते नवबौद्ध !

सनातन धर्म के अंतर्गत ही बौद्ध सम्प्रदाय की स्थापना करने वाले महात्मा बुद्ध की जयंती #बुद्धपुर्णिमा की ढेरों शुभकामनाएं

आजकल भगवान गौतम बुद्ध  के तथाकथित अनुयायीओ अर्थात नवबौद्धों और उसमें भी खासकर भीमटो ने हिन्दू धर्म पर अनर्गल टिप्पणी करने हिन्दू देवी देवताओं का अपमान करने, ब्राह्मणों, क्षत्रियो, वैश्यों को गाली देने को ही बुद्धिजम समझ लिया है । इन भीमंटो तथा कुछ दलित नेताओ ने दलितों को हिन्दुओ से अलग करके उन्हें भड़काकर राजनीति की रोटियां सेंकनी शुरू कर दिया है । बुद्ध के नाम पर नवबौद्ध आजकल हिन्दू समाज में नफरत और घृणा फैला रहे है ।

समस्या क्या बुद्ध को मानने से मतलब है चाहे विष्णु का अवतार मान ले या महात्मा मान ले या इंसान ही मान ले, और बुद्ध को आये हुए दुनिया में मात्र 2500 वर्ष हुए है । क्या उसके पहले इनके बाप दादाओं का धर्म नही था वे लोग अधर्मी थे? और कैसे यह मान ले की बौद्ध कोई धर्म है जब स्वयं बुद्ध ने स्वयं को सनातनी कहा है। "ऐसो धम्मो स्नातनो" तो अलग धर्म बना कर कब्जा तो नवबौद्धों ने किया है बुद्ध पर न की ब्राह्मणों ने,  यह दो कौड़ी की स्टोरी अब नही चलेगी समाज में। लोगो को बेवकूफ बनाना बंद करिये आप लोग। बौद्धिजम और जैनिज़्म सनातन धर्म ही है बुद्ध और महावीर इस धर्म के शुद्धि करता थे। इनको अलग मानकर इनके नाम पर जिन्होंने दूकान चलाई धूर्त वो है और ठग है।

ब्राह्मण वाद की नौटंकी रचनेवाले नावभोदुवे मुझे इतना बता दे की समस्त बौद्ध और जैन साहित्यों के रचनाकार कौन है?  क्योंकी बौद्ध तो धम्म है अर्थात सिद्धान्त पथ न की कोई धर्म बुद्ध का धम्म सनातन था ऐसा उन्होंने स्वयं कहा है। तो क्या आज कल के ये नवभोदुवे बुद्ध से ज्यादा होशियार हो गए है ?

समस्त बौद्ध साहित्यों के रचनाकार और बौद्ध मत में विभिन्न पथो यथा महायान हीनयान बज्रयान आदि के प्रवर्तक ब्राह्मण ही है। बुद्ध के प्रिय शिष्य अग्निमित्र ब्राह्मण, बुद्ध के प्रथम 4 शिष्य ब्राह्मण, बुद्ध के विहारों के लिए सर्वाधिक भूमि का दान करने वाले ब्राह्मण , बुद्ध की प्रमुख संगतियों के आयोजक ब्राह्मण। बुद्ध के ज्ञान देशना का सम्हालकर रखने वाले ब्राह्मण । फिर भी इन नावभोदुओ को कीड़ी कटती है ब्राह्मणो के नाम पर, अरे ब्राह्मण बुरा है क्यों मानते हो की कोई बुद्ध भी है। क्योंकी बुद्ध के सम्बन्ध में ज्ञान और समस्त ग्रन्थ तो ब्राह्मणो ने लिखा है। उनके मत को विभिन्न सम्प्रदायो के साथ समाज में प्रचारित ब्राह्मणों ने ही  किया। इस लिए बौद्ध धम्म कैसे सही हो गया अगर ब्राह्मण गलत है तो। किसी की उपेक्षा इस बात से नही हो सकती की वह अमुक जाती है और यार आप लोगो का फर्जीपन तो इसी बात से झलक जाता है जब आप लोग जातिगत बकवास करते है। जबकि बुद्ध ने जाती से ऊपर उठ कर मानवता की बात की तो ढोंगी कौन है आप या ब्राह्मण? अगर ब्राह्मण जातिवाद करता है तो आप क्या करते हो ??
बनेंगे बौद्ध और दिन भर जाती जाती ब्राह्मण ब्राह्मण यह ढोंगिज्म हो सकता है बौद्धिजम किसी सूरत में नही कहा जा सकता।

बुद्ध पूर्णिमा की ढेरों बधाई एवं शुभकामनाएं !

अजय कुमार दूबे

Monday, 16 April 2018

आओ सुनाएँ ड्रैगन कथा

चीन को #ड्रैगन का देश कहा जाता है पर क्या कभी किसी ने वास्तव में ड्रैगन देखा है? ड्रैगन कोई जीव था भी क्या? तो फिर ये ड्रैगन नामक काल्पनिक जीव आया कहाँ से ...?? जो भी हो इस काल्पनिक जीव ड्रैगन का चित्र तो उपलब्ध है जिसका प्रयोग चीनी इतिहास एवं चीनी वस्तुकला में अक्सर देखने को मिल ही जाता है । पिछले दिनों मुझे एक चाइनीज #बौद्ध_मंदिर में जाने का अवसर मिला,  वहाँ उस मंदिर की वस्तुकला में ड्रैगन के काल्पनिक चित्र को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया था । ड्रैगन का चीनी वास्तुकला में इतना प्रभावी स्थान देखकर मुझे इस काल्पनिक जीव "ड्रैगन" के बारे में जानने की इच्छा हुई, फिर जो जानकारी मुझे पता चली आज उसको आप सभी के साथ साझा कर रहा हूँ ☺️☺️

चीनी लोग अपने को ड्रैगन का वंशज कहते हैं, यह कथन प्राचीन चीनी राष्ट्र के टोटेम व उस से जुड़ी दंतकथा पर आधारित है । दंतकथा के अनुसार चीन के पूर्वज हुंग ती द्वारा मध्य चीन का एकीकरण किया जाने से पहले चीनी राष्ट्र का टोटेम यानी गणचिंह भालू था, कबीली राजा छियु को पराजित कर मध्य चान का एकीकरण करने के बाद हुंग ती ने अपने पक्ष में आ मिले विभिन्न कबीलों को मनाने के लिए टोटेम के लिए भालू का त्याग कर एक नया चिंह ले लिया, वह था ड्रैगन । ड्रैगन की आकृति भालू के सिर और सांप के शरीर को मिला कर बनायी गई थी । प्राचीन चीनी भाषा में सांप का नाम चो था, उस का उचारण छो भी था, जिस का दूसरा अर्थ पुल था । हुंगती के निधन के बाद उसे छोशान यानी पुल का पहाड़ जगह दफनाया गया । इस से सिद्ध हुआ है कि हुंगती अपनी मातृ गन चिंह की पूजा करते थे । ड्रैगन वाला टोटेम हुंगती के पितृ व मातृ टोटेमों का मिश्रित रूप था । ड्रैगन की आकृति बहुत विशेष रूप की थी, इस में चीनी राष्ट्र के विकास की प्रक्रिया में विभिन्न जातियों के महा विलय की प्रक्रिया अभिव्यक्त होता है ।

     कालांतर में चीनी राष्ट्र का प्रतीक होने वाले ड्रैगन का चिंह विभिन्न चित्रों में व्यक्त हुए और धीरे धीरे इस की लिपि भी बनायी गई । चीन के प्राचीन राजवंश सांग की राजधानी के खंडहर की खुदाई में प्राप्त कच्छ खोलों तथा पशु हड्डियों पर खुले अक्षरों में ड्रैगन का शब्द भी उपलब्ध हुआ है । खुदाई में मिले सूदूर प्राचीन काल के चीनी मिट्टी के बर्तनों पर भी ड्रैगन की तस्वीरें देखने को मिली है । कुछ समय पहले  चीनी पुरातत्वी कार्यकर्ताओं ने उत्तर पूर्व चीन के ल्याओ निन प्रांत के फुसिन शहर के छाहाई प्राचीन खंडहर की खुदाई में दो चीनी मिट्टी के बर्तनों के टुकड़े मिले, जिन पर ड्रैगन के चित्र अंकित हैं, एक चित्र उड़ते हुए ड्रैगन का है और दूसरा कुंडली मारे ड्रैगन का, दोनों चित्र बहुत सजीव हैं, ड्रैगन के शरीर पर छिलकाओं की रेखाएं बहुत स्पष्ट दिखती है ।

    चीनी राष्ट्र के पूर्वजों का टोटेम बनने के बाद ड्रैगन चीनी राष्ट्र से जुड़ा हुआ है । ड्रैगन के संदर्भ में भी बड़ी मात्रा में दंतकथाएं और लोककथाएं उत्पन्न हो गई। एक दंतकथा के अनुसार चीनी राष्ट्र के एक पूर्वज सम्राट यान ती का जन्म तङ नाम की उस नारी से हुआ था, जो स्वर्ग लोक के दिव्य ड्रैगन के प्रभाव में आने के बाद गर्भवर्ती हुई थी । चीनी राष्ट्र के एक दूसरे पूर्वज हुंगती का जन्म इस के माता के सप्तर्षि ग्रह से प्रभावित होने के बाद हुआ था तथा महाराजा यो का जन्म उस की माता के लाल ड्रैगन से प्रभावित होने से हुआ तब इस तरह कहा जाए, तो चीनी राष्ट्र के पूर्वज ड्रैगन के वंशज थे, तभी तो उनकी संतानें भी अपने को  ड्रैगन के वंशज मानते है ।

Thursday, 8 February 2018

आशाएं और विश्वास के प्रतीक प्रधानमंत्री मोदी

आज लोकसभा में जिस तरह से प्रधानमंत्री मोदी जी इतने विरोध के बावजूद भी बिना विचलित हुए, बिना हड़बड़ाहट के और बिना कोई ग़लती किये बोलते रहे ये दिखाता है कि इतना विरोध पर्याप्त नही है उनकी आवाज दबाने के लिए !
बल्कि काँग्रेस आज प्रधानमंत्री जी को सदन में बोलने नही दे रही ये उनकी नकारात्मक राजनीति को प्रदर्शित करता है जो आज पूरे देश ने टीवी पर देखा .......!!!

जब रेडियो के जमाने मे रेडियो सिर्फ आपके यानी काँग्रेस के गुण गाता था क्या वो भूल गए, जब टीवी आया था तो वो भी सिर्फ आपकी सरकार के अच्छे काम गिनाता था भूल गए जो आज कहते हो कि मीडिया सिर्फ मोदी मोदी करता है .......???
जब पंचायत से पार्लियामेंट तक आपका ही सरकारें हुआ करती थी विरोध के नाम पर कोई नही था तब आपने देश के टुकड़े किये और विपक्ष को कभी भी उठने नही दिया और आज आप सदन में भी प्रधानमंत्री जी को बोलने नही देते
हद है जी ....!!!

आपने उस समय यानि 70 सालों में नियत से काम किया होता तो आज विपक्ष 4 से +282 के जादुई आंकड़े से ज्यादा नही सीट हासिल कर सकता था लेकिन आज आप प्रधानमंत्री को सदन में बोलने तक नही दे रहे ....!!!
आप लोकतंत्र की बात करते है कि लोकतंत्र खतरे में लोकतंत्र तब खतरे में नही था जब राहुल ने बीच सदन में पूरे देश के सामने पारित पेपर फाड़ कर मनमोहन जी के पिछवाड़े में डाल दिया था
लोकतंत्र आज खतरे में है जब आप देश के स्पष्ट बहुमत से चुनी सरकार के प्रधानमंत्री को सदन में बोलने नहीं दे रहे ........!!!

योजनाओं के नाम पर आपने सिर्फ नाम दिया राजीव गाँधी योजना, इंद्रा योजना और नेहरू योजना लेकिन ये योजनाए खत्म किसने की शायद किसी को नही पता आपने सिर्फ अपने स्विस बैंक के एकाउंट लबालब किये और आज जब कोई अन्य तत्कालिक प्रधानमंत्री अपनी उपलब्धियों को गिनवा रहा है तो आप उसे बोलने नही देते ....!!!

आप आधार कार्ड लाये ओर मोदी सरकार आते ही आप बोले कि मोदी इसे खत्म कर रहा है आज जब मोदी उस आपके बनाये कार्ड को सही दिशा में ले जा रहा है तो आपका ये विधवा विलाप क्यों ...?
पूरी दुनिया मे ऐसे कार्ड होते है जो किसी भी नागरिक का पूरा लेखा जोखा निकाल लेते है आज हिंदुस्तान में आपके बनाये आधार कार्ड का विरोध आपके द्वारा ही क्यों ?
औऱ जब देश का PM इसके फायदे गिना रहा है तो आप उसे बोलने नही देते ...????
आज देश की यथास्थिती जो है वो आपने भाजपा के मोदी को विरासत में दी है बताओ 70 सालों में जहां बिजली नही, पानी नही, शिक्षा नही, चिकित्सा नही और सड़कें नही उसका जिम्मेदार कौन ...???

आज कौई PM बता रहा है कि उसने 4 सालों में क्या किया तो आप उसकों बोलने नही दे रहें आखिर क्यों ...???
भारत कृषि प्रधान देश है आपने 70 सालों में देश के किसानों के लिए क्या किया आज कोई PM कृषि कार्यों में दुग्ध उत्पादन, किसान फसल बीमा योजना और किसान क्रेडिट कार्ड के लिए कुछ बता रहा है तो आप कहते है कि जुमले बाजी बन्द करो और सदन में PM को बोलने नही देतें ....???
प्रधानमंत्री द्वारा किये गए किसी भी कार्य को आप यानि काँग्रेस पहले जाति समुदाय से जोड़ती है, फिर धर्म से जोड़ती है और अंत मे निम्न वर्ग, मध्यम वर्ग और उच्च वर्ग से जोड़ती है ..?
क्या सत्ता में रहते हुए सभी को खुश रखा जा सकता है ये आप ही ने सिखाया है आपने जिन्हें छोड़ दिया था अब नई सरकार उन्हें उठा रही है तो आप सदन में उन्हें बोलने भी नही देते
आखिर क्यों ...?
जब देश के नए PM ने देश के गरीबों के लिए इन्सुरेंस योजना लागू कि आयुष्मान योजना जिसमे देश के 50 करोड़ लोगों को सीधा लाभ मिलेगा आप उनमे भी खामियां ढूंढ रहे हैं !
क्या आपने देश के 100 करोड़ गरीबों के स्वस्थ्य के लिए सोचा जो बिना इलाज के मारे जाते है और आज कोई PM ये उपलब्धियाँ गिना रहा है तो आप उसे सदन में बोलने भी नही देतें ....???
कुल मिलाकर आज आप सदन में देश के प्रधानमंत्री को बोलने नही दे रहे भविष्य में विपक्ष से अच्छी उम्मीद न करें ....?
आज देखा कि आपका गला विरोध करते करते भर आया और बैठ गया लेकिन मोदी जी लगातार अपनी उपलब्धियों को गिना रहे थे
अफसोस आपने ये नही देखा लेकिन पूरे देश ने टीवी पर आपका विरोध देखा
उम्मीद है 2019 में भी जनता ऐसा ही PM चाहेंगीं और काँग्रेस जैसा विपक्ष तो बिल्कुल नही
मोदी जी जब इतने विरोध में बिना लिखा भाषण पढ़ सकते है जहाँ आपके नेता प्रिप्लान स्पीच भी देख कर पढ़ते है तो एक कारण बता दो 2019 में मोदी क्यों नही ...????
हम तो मोदी जी को ही चुनेंगे,  मोदी से आशाएं अधिक है तो फिर उन्हें वक्त कम क्यों दिया जाय ?? विकास के रफ़्तार को क्यों कम करें हम ?? इसबार अभी बहुत कुछ अधुरा है तो उसे पूरा करने का विश्वास भी मोदी से ही है।

शिकायते भी करते है, उम्मीद भी करते है और हाँ विश्वास भी मोदी पर ही है 👍
Save nation Vote modi Jai hind 💐

वन्देमातरम !
अजय कुमार दूबे

Wednesday, 17 January 2018

विश्लेषण - न्यायिक आस्था पर सवाल या बवाल ??

पाठक मित्रो मैंने सोचा क्यों न सुप्रीम कोर्ट के जजों के उस विवाद का विश्लेषण किया जाय जो 5 दिन बीत जाने के बाद भी नहीं सुलझा है. तो लीजिये प्रस्तुत है इस मामले पर मेरा भी विश्लेषण ....

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ 4 जजों द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के बाद, पूरे देश में न्यायपालिका की विश्वसनीयता पर बहस हो रही है. इस बीच इस विवाद को सुलझाने की कोशिशें लगातार हो रही हैं.  लेकिन ये विवाद अब तक पूरी तरह सुलझ नहीं पाया है. जिस दिन से सुप्रीम कोर्ट के 4 वरिष्ठ जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके चीफ जस्टिस पर आरोप लगाए थे. उसी दिन से मीडिया में बहुत से कयास लगाए जा रहे हैं. इस पूरी Controversy को लेकर बहुत सी Theories चल रही हैं. लेकिन अभी तक आपको किसी ने ये नहीं बताया होगा कि असल में ये पूरा विवाद किस वजह से हुआ? आज हमारे पास इस विवाद की Inside Story है. जो हम आपको आगे दिखाएंगे. लेकिन सबसे पहले आपके लिए ये जानना ज़रूरी है कि इस मामले में आज (मंगलवार, 16 जनवरी) क्या हुआ?

आज (मंगलवार, 16 जनवरी) सुबह चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने अपने खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले चारों जजों से मुलाकात की. अदालत की कार्यवाही शुरू होने से पहले ये जज आपस में मिले और इनके बीच करीब 25 मिनट तक बातचीत हुई. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और चार जजों के बीच क्या बातचीत हुई, ये तो किसी को नहीं पता. लेकिन चीफ जस्टिस ने बाकी जजों को आश्वासन दिया है कि सभी मसलों पर विचार विमर्श करके हल निकाला जाएगा. माना जा रहा है कि कल सुबह ये चारों जज एक बार फिर से चीफ जस्टिस से मिलेंगे. इससे पहले कल (सोमवार, 15 जनवरी) Attorney General... K. K. Venugopal ने दावा किया था कि जजों का ये विवाद पूरी तरह से सुलझ गया है, और अब सब कुछ सामान्य है. लेकिन आज उन्होंने अपनी बात से पलटते हुए कहा कि अभी इस विवाद को सुलझने में 2 से 3 दिन और लगेंगे.

अब आपको ये बताते हैं कि इस पूरे विवाद की असली वजह क्या है? शुक्रवार यानी 12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के 4 वरिष्ठ जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके ये आरोप लगाया था कि चीफ जस्टिस कुछ खास मामलों को, अपनी पसंद के जजों के पास सुनवाई के लिए भेजते हैं. लेकिन उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपना असली दर्द नहीं बताया.. और आज हम आपको इसी दर्द के बारे में बताएंगे.

इन जजों और चीफ जस्टिस के बीच विवाद तो बहुत पहले से चल रहा था. लेकिन 12 जनवरी को इन जजों का मतभेद खुलकर सबके सामने आ गया. 11 जनवरी की शाम को.. यानी प्रेस कॉन्फ्रेंस से एक दिन पहले चीफ जस्टिस ने 5 जजों के नाम की एक संवैधानिक पीठ के गठन की तैयारी कर ली थी. और 12 जनवरी की सुबह इसे अंतिम रूप देते हुए सुप्रीम कोर्ट के एडिशनल रजिस्ट्रार ने अपने हस्ताक्षर करके एक नोटिस जारी कर दिया. इस नोटिस में 5 जजों के नाम संवैधानिक पीठ में शामिल किए गए थे और इस बेंच को कुल 8 मामलों की सुनवाई करनी है. ये 5 जज थे - खुद चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस ए के सीकरी, जस्टिस ए एम खानवेलकर, जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस अशोक भूषण. लेकिन यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि चीफ जस्टिस के बाद 4 Senior Most जजों का नाम इस बेंच में शामिल नहीं था. यानी जस्टिस जे चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ का नाम इस संविधान पीठ में शामिल नहीं था.

आमतौर पर सुप्रीम कोर्ट में संविधान पीठ जब गठित की जाती है, तो उसमें चीफ जस्टिस के अलावा बाकी जजों में Senior Most जजों को प्राथमिकता दी जाती है. लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ. यहां आपके लिए ये समझना ज़रूरी है कि ये चारों जज चीफ जस्टिस के बाद सबसे सीनियर हैं. सुप्रीम कोर्ट में जजों की वरिष्ठता यानी Seniority का भी एक क्रम होता है. इसमें नंबर 1 पर चीफ जस्टिस होते हैं और उसके बाद के क्रम Seniority के हिसाब से तय होते हैँ. सुप्रीम कोर्ट में फिलहाल कुल 25 जज हैं. और इस हिसाब से 25 वें नंबर के जज सबसे जूनियर जज हैं.

इस लिहाज़ से प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले चारों जज नंबर 2, नंबर 3, नंबर 4 और नंबर 5 पर हैं. लेकिन जो संविधान पीठ बनाई गई, उसमें इन चारों जजों के बजाए... इनके जूनियर जजों को उस बेंच में रखा गया. और ये जूनियर जज Seniority में नंबर 6, नंबर 17, नंबर 18 और नंबर 19 पर हैं.  जैसे ही संवैधानिक पीठ के गठन का नोटिस इन वरिष्ठ जजों को मिला, तो 12 जनवरी को ही ये चारों जज सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस से मिलने पहुंच गए. और इन जजों ने इस संवैधानिक पीठ के गठन पर ऐतराज़ जताया. लेकिन संवैधानिक पीठ में जजों के नाम में कोई फेरबदल नहीं हुआ और इसी के बाद इन जजों ने 12 जनवरी की दोपहर में.. सवा 12 बजे चीफ जस्टिस के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दी.

नोट करने वाली बात ये है कि इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन जजों ने संवैधानिक पीठ के गठन का ये मुद्दा नहीं उठाया और सिर्फ यही कहा कि चीफ जस्टिस कुछ खास मामलों को अपनी पसंद के जजों के पास भेज रहे हैं. अब आपको उन मुख्य मामलों के बारे में बताते हैं, जिन पर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा द्वारा गठित संवैधानिक पीठ को सुनवाई करनी है.
इनमें सबसे पहला मामला है आधार का, जिसमें इस बात पर सुनवाई होनी है कि क्या आधार से आम नागरिक की निजता के अधिकार का उल्लंघन होता है ? दूसरा मामला है केरल में शबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का. और तीसरा मामला है IPC की धारा 377 यानी समलैंगिकता की परिभाषा में संशोधन का. इसके अलावा 5 और मामलों की सुनवाई भी इसी संविधान पीठ को करनी है. संविधान पीठ.. कल यानी बुधवार (17 जनवरी) से.. एक एक करके इन मामलों पर सुनवाई करेगी.

वैसे ये पहली बार नहीं हुआ है.. जब किसी महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई जूनियर जजों को सौंपी गई हो. हमारे पास कुछ उदाहरण हैं. सबसे बड़ा मामला है पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या का. इस मामले की मुख्य दोषी नलिनी और बाकी दोषियों ने 1998 में अपनी फांसी की सज़ा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी. लेकिन उस वक्त भी चीफ जस्टिस ने इस High Profile मामले की सुनवाई के लिए... तीन जूनियर जजों के पास भेजा था. उन जजों के नाम थे - जस्टिस K T थॉमस, जस्टिस DP वाधवा और जस्टिस SSM कादरी.

इसके अलावा 1999 में CBI ने बोफोर्स मामले में जब नई चार्जशीट दाखिल की, तो उद्योगपति श्रीचंद हिंदुजा और गोपीचंद हिंदुजा को आरोपी बनाया गया. Trial Court से ज़मानत नहीं मिलने के बाद हिंदुजा भाई.. सुप्रीम कोर्ट पहुंचे. और फिर तत्कालीन चीफ जस्टिस ने इस मामले को जूनियर जज MB शाह को सौंपा. लेकिन उस वक्त भी इस पर किसी ने सवाल नहीं उठाए थे.

2007 में जब सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस हुआ, तो सुप्रीम कोर्ट में उसके भाई ने एक Writ Petition दायर की. ये मामला भी उस वक्त बहुत High Profile था और राजनीति से प्रभावित था. लेकिन इस मामले की सुनवाई भी जूनियर जज जस्टिस तरुण चैटर्जी ने की थी.

2010 में 2G घोटाले का केस भी उस वक़्त के जूनियर जज, जस्टिस GS सिंघवी की बेंच को दिया गया था.

बाबरी मस्जिद केस में जब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लालकृष्ण आडवाणी और बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं को साज़िश के आरोपों से मुक्त किया तो CBI ने 2011 में फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की. और उस वक्त ये मामला भी जूनियर जज जस्टिस टीएस ठाकुर और जस्टिस वीएस सिरपुरकर की बेंच को दिया गया.

2012 में कोयला घोटाले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर हुई. उस याचिका को भी उस वक्त के जूनियर जज RM लोढ़ा ने ही सुना था.

ये लिस्ट बहुत लंबी है. और इससे ये साफ होता है कि सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में पहले भी महत्वपूर्ण मामले जूनियर जजों को सुनवाई के लिए दिए जाते रहे हैं. लेकिन इतना हंगामा कभी नहीं हुआ. सवाल ये है कि अचानक इतना विवाद क्यों हो रहा है और ये विवाद मौजूदा चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के साथ ही क्यों हो रहा है?

यहां हम आपको ये याद दिलाना चाहते हैं कि 12 जनवरी को अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुप्रीम कोर्ट के इन चारों जजों ने अपनी दो महीने पुरानी एक चिठ्ठी भी सार्वजनिक की थी, और इस चिठ्ठी में इन जजों ने जो सबसे महत्वपूर्ण बात कही थी.. वो ये थी कि चीफ जस्टिस के पास अलग अलग Cases को अपने विवेक से.. अलग अलग जजों के पास भेजने का अधिकार है.. लेकिन सुप्रीम कोर्ट में सभी जज बराबर हैं और मुख्य न्यायाधीश इनमें सबसे पहले हैं, वो ना तो किसी जज से ज्यादा हैं और ना ही कम.

ये लाइने मैं एक बार फिर आपको पढ़कर सुनाना चाहता हूं
शायद ये चारों जज न्यायशास्त्र के इस सिद्धांत को भूल गए. क्योंकि अगर ये जज.. खुद इस सिद्धांत को मानते हैं तो फिर उन्हें इस बात से कोई समस्या नहीं होनी चाहिए.. कि महत्वपूर्ण मामलों को, उनके बजाए.. दूसरे जजों को दिया जा रहा है.

ज़रा गौर फरमाए :)

"आपकी मीडियाबाजी में सुप्रीम कोर्ट की कोई सूरत बदलने की कोशिश तो दिखी नहीं। माफ़ कीजिए मीलॉर्ड, ऐसा लगा कि सिर्फ हंगामा करना ही मकसद था।" #JudgesPressConference

Saturday, 13 January 2018

चर्चा में - अर्बन नक्सलस के लेखक विवेक अग्निहोत्री

कल विश्व पुस्तक मेले में फ़िल्मकार श्री #VivekAgnihotri जी से मुलाकात हुई ... अवसर था उनकी आने वाली पुस्तक #UrbanNaxals के मुख्यपृष्ठ के अनावरण का ... शहरी नक्सलियो पर आधारित यह बुक इसी वर्ष मार्च में उपलब्ध हो जाएगी । एक साहसी फ़िल्मकार के तौर पर विवेक अग्निहोत्री ने पहले ही नक्सलियो के स्लीपर सेल अर्थात शहरी नक्सलियो की सच्चाई अपनी बहुचर्चित फिल्म #BuddhaInTrafficJam के जरिये उजागर कर चुके है ... अब उनकी आने वाली यह अगामी पुस्तक का उद्देश्य शहरो में बैठे नक्सलियो जो मिडिया, उच्च शिक्षण संस्थानों, नौकरशाही, राजनीति और यहाँ तक की न्यायपालिका में भी बैठे है के छुपे हुए एजेंडे को उजागर करना है । विवेक जी जैसे साहसी और राष्ट्रप्रथम के लक्ष्य को लेकर आगे चलने वाले व्यक्ति को हम सभी का भरपूर समर्थन मिलना चाहिए ... विवेक जी से हुई संक्षिप्त वार्ता में जब मैंने उनके द्वारा जिग्नेश मेवाणी को ओपेन डिबेट के लिए चुनौती देने पर पूछा तो वो बोले की "जिग्नेश जैसे नक्सलीयो की पोल खोलना ही तो उनका मकसद है मै तो चाहता था की वो मुझसे खुली बहस करे और मुझे बताये की उसको इस आज़ाद भारत में अब आज़ादी किस चीज़ से चाहिए लेकिन उसके में इतनी हिम्मत भी नही की वो मेरे जैसो का सामना कर सके"

विवेक जी से जब मैंने कहा की आपकी फिल्म 'बुद्धा इन ट्रेफिक जाम' ने लोगो को अपने ही बीच रहने वाले नक्सलियों के स्लीपर सेल से सावधान रहने की नसीहत मिलती है तो ऐसे में एक जिम्मेदार व्यक्ति के तौर पर वे आगे क्या करेंगे ? चलते चलते विवेक जी ने कहा "आगामी बुक इसी का विस्तार है...और एक फिल्म मेकर के रूप में आगे मै पूर्व प्रधानमंत्री श्री लालबहादुर शास्त्री जी के ताशकंद में हुए रहस्यमय हत्या के विषय पर फिल्म बनाने जा रहा हूँ ... इस फिल्म के जरिये शास्त्री जी के हत्या के रहस्यों को उजागर करने की छोटी सी कोशिश करूँगा "

विवेक अग्निहोत्री जी को उनके अगामी फिल्मो और उनकी आने वाली इस "Urban Naxals" किताब के सफल होने की ढेरों शुभकामनायें :)

अजय कुमार दूबे

Thursday, 4 May 2017

AAP में झगड़ा-सुलह-विश्वास और ड्रामा..

दिल्ली MCD के नतीजो के बाद शुरू हुआ आम आदमी पार्टी का घमासान बड़े ही नाटकीय ढंग से सुलह कर ली गई है ऐसा प्रतीत तो हो रहा है । पिछले दिनों उत्तरप्रदेश में मुलायम के समाजवादी कुनबे की नौटंकी हम सभी भलीभाती देख चुके है ऐसे में आपियो की नौटंकी फ्लॉप ही रही ।AAP_का_ड्रामा जिसकी शुरुवात पार्टी में अलग थलग पड़े अर्धनारेश्वर विश्वास ने सोशल मीडिया में एक वीडियो जारी करके किया । हम भारत के लोग नामक इस वीडियो में कवि जी ने राष्ट्रवाद के चासनी के बहाने केजरीवाल पर हमला किया और लोगो का खूब समर्थन बटोरा । उसके तुरंत बाद दिल्ली MCD में AAP के करारी हार के बाद केजरीवाल से मिलकर कुमार विश्वास ने पार्टी का डैमेज कंट्रोल करने के बहाने 3-4 चैनलों पर धडाधड इंटरव्यू दे डाले । मामला तब बिगड़ गया जब बडबोले डॉ साहब इन इंटरव्यूज के सहारे केजरीवाल के सभी नीतियों को धता बताने लगे और आप के शीर्ष नेतृत्त्व पर गंभीर आरोप लगा बैठे, कविवर अपनी वाकपटुता से केजरीवाल से शीर्ष नेतृत्त्व में बदलाव की अपील करने लगे और हार से निराश पार्टी के अन्दर से 25 से अधिक विधायको ने उनकी इस मांग पर समर्थन भी कर दिया I

30 से अधिक MLA का समर्थन देखकर चालाकी से विश्वास साहब केजरीवाल से ही पार्टी के संयोजक पद छोड़ने की मांग करने लगे ... महाधूर्त और ठग केजरीवाल डैमेज कंट्रोल के चक्कर में खुद पे हमला कैसे बर्दाश्त करते ...दिखावा में दिलीप पांडे और संजय सिंह से स्थिपा भी ले लिया गया परन्तु चतुर विश्वास नही माने और पार्टी नेतृत्त्व में बदलाव की बात मीडिया में बेबाकी से करते रहे । अपने ऊपर बढ़ता दवाव देखकर केजरीवाल के इशारे पर मनीष सिसोदिया, संजय सिंह और आशुतोष ने कवि विश्वास के खिलाफ MLA अमानुतुल्ला खान का इस्तेमाल शुरू किया ।

अमानुतुल्ला खान ने खुलकर कुमार विश्वास पर बीजेपी RSS के एजेंट होने और विधायको के खरीद फरोख्त में शामिल होने का संगीन आरोप लगा दिया... विश्वास आहत हुए और PAC की बैठक में नहीं पहुचे ... अमानुतुल्ला मीडिया में जाकर आरोप लगाते रहे ... परन्तु पार्टी के 25-30 विधायको का लगातार समर्थन विश्वास को मिलता देख अरविन्द और मनीष ने अमानुतुल्ला का PAC से स्थिपा ले लिया, केजरी ने ट्वीट किया कुमार विश्वास मेरा छोटा भाई है और कुमार को विश्वास में लेने की कोशिश की, उधर अमानुतुल्ला ने आरोप वापस नही लिए और कवि जी पर आरोप लगाते रहा... पाखंडी विश्वास खुद कभी योगेन्द्र यादव और प्रशांत भूषण को बीजेपी का एजेंट बोलते थे अपने पर पड़ी तो मीडिया के सामने आके रोने लगे और एक रात में बड़ा फैसला लूँगा कहकर अमानुतुल्ला और उसके पीछे खड़े लोगो पर निशाना लगाने लगे ।

कभी पार्टी से लात मारकर योगेन्द्र, प्रशांत को निकालने वाला केजरीवाल का समय बदल चूका था अभी एक के बाद एक पार्टी की हार और कुमार को मिल रहा 25 से 30 विधायको का समर्थन उसे नए पैतरे करने को मजबूर कर रहा था ... आनन फानन में देर रात केजरी, मनीष को लेकर कुमार विश्वास को मनाने उनके घर पहुच गए । एक तरफ मुस्लिम परस्त केजरीवाल का खास अमानुतुल्ला और दूसरी तरफ बागी कवि ..उस्तादो का उस्ताद केजरीवाल के चाल में डॉ साहब आ गये ..अमानुतुल्ला खान को पार्टी से निलंबित कर दिया गया वैसे ही जैसे राशन कार्ड वाला संदीप और फर्जी डिग्रीधारक जीतेन्दर तोमर निलंबित हुए थे जो अभी भी पार्टी के छोटे बड़े सभी बैठको में आते भी है और MLA तो है ही ... कोई पद नही लूँगा बोलने वाले शिखंडी विश्वास राजस्थान का प्रभार पाकर शांत हो गए है ... कभी केजरीवाल के धरनो में माइक टेस्टिंग करने वाले कुमार विश्वास अपने औकातानुसार पद पा गये है पंजाब में संजय सिंह की तरह राजस्थान में टिकट बेचने का सुनहरा ख्वाब भी है ... तो कुमार साहब टिकट बेचिए और आप भी लूट का मजा लीजिये  


अब विश्वास साहब मौका देखकर आप में सुलह कर चुके है केजरीवाल से नाराजगी ख़तम हो गई है सड़ जी पहले की तरह ही दोनों पदों पर बिराजमान रहेंगे.. कुछ समय बाद सभी निलंबित MLA बहाल हो जायेंगे .. राजस्थान में हार का ठीकरा कुमार पर फूटना तय हो गया है ... डॉ साहब टिकट बेचकर मोटा पैसा बनाने के ख्वाब में अन्दर ही अन्दर प्रफुल्लित है :) :)

अजय कुमार दूबे